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जेल में मिला 500 के नकली नोट बनाने का आइडिया

जेल में मिला 500 के नकली नोट बनाने का आइडिया:प्रोपर्टी डील में खपाने की कोशिश में पकड़े थे 2 करोड़; इंटरनेशनल गिरोह पर शक
जोधपुर 2 करोड़ के नकली नोट पकड़े जाने के बाद जोधपुर पुलिस की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। नकली नोट को बनाने में अंतरराष्ट्रीय गिरोह के हाथ भी शामिल होने पर शक किया जा रहा है। मुख्य आरोपी संजय शाह को यह आइडिया भीलवाड़ा जेल में नकली नोट गिरोह के सदस्य सूरज लखारा से मिला था। सूरज लखारा भीलवाड़ा जेल में नकली नोट मामले में ही बंद था। वहीं पर संजय की मुलाकात उससे हुई थी। संजय ने नकली नोट बनाने का आइडिया तो सूरज से ले लिया, लेकिन उसे पूरी तरह से तैयार नहीं कर पाया और नोट में कई खामियां रह जाने से इनका प्लान फेल हो गया। सबसे बड़ी बात यह है कि पुलिस भी मान रही है कि अगर इस गिरोह के साथ सूरज लखारा होता तो नोट की क्वालिटी को बेहतर कर यह करोड़ों रुपए बाजार में उतार देते। क्या है करोड़ों के नकली नोट की कहानी... जोधपुर की शास्त्रीनगर थाना पुलिस ने 10 नवंबर को इलाके में एक कार से 2 करोड़ रुपए बरामद किए थे। पहले पुलिस को यह पैसा हवाला का होने का संदेह था। लेकिन जब जांच की तो यह सभी नोट नकली पाए गए। जिसके बाद पुलिस ने कार सवार नागौर के श्रीबालाजी गांव निवासी हनुवंत सिंह को गिरफ्तार किया था। नकली नोट मामले में 11 नवंबर को जोधपुर की शास्त्रीनगर थाना पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था। नकली नोट मामले में 11 नवंबर को जोधपुर की शास्त्रीनगर थाना पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में सामने आया कि यह पैसा उसके सेठ नागोर हाल मुम्बई निवासी बालचंद शर्मा, नरेश शर्मा व राजू शर्मा को मकान बेचने पर मिला था। उन्हें नकली नोटों का पता चलने के बाद वह उसे लौटाने जा रहा था। इसके बाद पुलिस ने नकली नोट देने वाले गंगाणा के अरिहंत आदित्य निवासी संजय शाह, रातानाडा के हनुवंत नगर निवासी हेमंत कांकरिया, पाल देवासियों का बास निवासी भागीरथ उर्फ भगाराम देवासी को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों ने 3 करोड़ 21 लाख में मकान का सौदा किया था। इसमें से 1 करोड़ 21 लाख रुपए चेक से दिए। बाकी 2 करोड़ रुपए कैश दिए थे। इसमें से 1 करोड़ 74 लाख रुपए नकली नोट थे। संजय शाह था दलाल और मास्टर माइंड जांच में सामने आया कि मकान के सौदे में संजय शाह दलाल था। उसी नकली नोट की पूरी कहानी को तैयार किया था। संजय को पता था कि पीछे से दिया जा रहा 2 करोड़ रुपए का कैश ब्लैक मनी है। इस लिए उन्होंने उसमें 1 करोड़ 74 लाख रुपए के नकली नोट मिला दिए थे। जोधपुर की शास्त्रीनगर थाना पुलिस को इसी कार में नोटों की खेप होने की सूचना मिली थी। जोधपुर की शास्त्रीनगर थाना पुलिस को इसी कार में नोटों की खेप होने की सूचना मिली थी। सांगरिया में तैयार किया गया था नकली नोट संजय शाह ने मकान खरीदने वाले हेमंत कांकरिया को इस प्लान में शामिल किया। उसके बाद भागीरथ को भी इसमें शामिल किया गया। भागीरथ व संजय के बीच करोड़ों रुपए का लेनदेन चल रहा था। इन सभी ने सांगरिया में एक मकान में नकली नोट बनाने का प्लांट लगाया और काम शुरू किया। A4 के पेपर में प्रिंट निकाला आरोपियों ने नोर्मल रंगीन प्रिंटर से A4 साइज के बेहतर क्वालिटी वाले पेपर पर 500-500 के नोटों के प्रिंट निकाले और उससे नोटों की गड्‌डी को तैयार किया था। यह एक पेपर से तीन नोट बना रहे थे। संजय को भीलवाड़ा जेल में दिया था नकली नोट का आइडिया संजय एक मामले में भीलवाड़ा जेल में बंद रहा था। उसी समय भीलवाड़ा जेल में नकली नोट मामले में सूरज लखारा नाम के युवक भी बंद था। सूरज के तार देश में नकली नोट लाने वाले कई गिरोह से थे। वहीं सूरज ने संजय को नकली नोट बनाने का आइडिया दिया था। सूरज के आइडिया पर संजय व उसके साथियों ने सांगरिया में नकली नोट तो तैयार कर दिया। लेकिन उसमें कई खामियां रह गईं। कई नोट की सीरीज एक ही थी, नोट के बीच में धातु का तार भी सेट नहीं कर पाए थे। इसी के चलते मकान बेचने वाले को नकली नोट का पता चल गया था। पश्चिम बंगाल तक जुड़ सकते हैं तार पुलिस इस मामले को काफी गंभीरता से ले रही है। जिस सूरज लखारा ने इन लोगों को नकली नोट का आइडिया दिया था। वह नकली नोट गिरोह से ही जुड़ा हुआ था। ऐसे में अगर सूरज इन लोगों के साथ सांगरिया में नोट बना रहा होता तो नोट की क्वालिटी ओर बेहतर कर लेते है। संदेह यह भी है कि इन लोगों का प्लान अगर सफल हो जाता तो यह लोग पश्चिम बंगाल में सक्रिय नकली नोट गिरोह के साथ मिलकर प्रदेश में करोड़ाें रुपए लेकर आ जाते। दो करोड़ के नकली नोट में सभी 500 रुपए के थे, पैसा हवाला का बताया जा रहा था लेकिन जांच में यह नकली नोट निकले। दो करोड़ के नकली नोट में सभी 500 रुपए के थे, पैसा हवाला का बताया जा रहा था लेकिन जांच में यह नकली नोट निकले। आरोपियों ने मकान का सौदा होने के बाद रजिस्ट्री के समय नकली नोट दिए थे। उस समय आरोपियों ने सभी गड्‌डी पर एक एक नोट असली रखा था। अब इस पैसे को बेचानकर्ता ने बाजार में चलाया तो उसे नकली नोट का पता चला। इसके बाद उसने आरोपियों पर नाराजगी भी जताई ओर असली नोट मांगे। इसी को लेकर बेचानकर्ता ने अपने ड्राइवर के साथ यह नोट जोधपुर भेजे थे। आरोपियों ने ड्राइवर को फंसाने के चक्कर में गाड़ी में बड़ी मात्रा में पैसा होने की सूचना पुलिस को दे दी थी। इस मामले में कई अंतरराष्ट्रीय गिरोह के हाथ होने का संदेह है। इसके चलते सभी सुरक्षा एजेंसी NIA, SOG व ATS भी इस मामले में जानकारी ली है और अब आरोपियों से पूछताछ भी करेगी। अभी जांच जारी, प्रदेश में आ सकते थे करोड़ों के नकली डीसीपी वेस्ट गौरव यादव ने बताया- पुलिस नकली नोट मामले में जांच कर रही है। पूछताछ में सामने आया कि मुख्य आरोपी संजय ने नकली नोट बनाने का आइडिया भीलवाड़ा जेल में बंद कैदी सूरज लखारा से लिया था। यह नोट पूरी तरह से परफेक्ट नहीं बना पाए थे। संदेह यहीं है कि अगर भीलवाड़ा जेल में बंद सूरज लखारा इनके साथ शामिल होता तो यह लोग पूरे प्रदेश में करोड़ों रुपए के नकली नोट निकाल देते । अभी पुलिस इस मामले में हर एंगल से जांच कर रही है। इस मामले में कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।

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