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गुरु पूर्णिमा कब हैं और क्यों मनाई जाती हैं ?

गुरु पूर्णिमा क्यों मनाई जाती है ?

गुरु की पूजा के लिए हर साल आषाढ़ माह के शुक्लपक्ष की पूर्णिमा के दिन गुरु पूर्णिमा का त्योहार मनाया जाता है। मान्यताओं के अनुसार गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व महर्षि वेदव्यास की जयंती के रूप में मनाया जाता है। गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु के आशीर्वाद से धन-संपत्ति और सुख-शांति का आशीर्वाद पाया जा सकता है। 


मनुष्य और गुरु का एक अटूट संबंध है। मनुष्य जीवन में गुरू को देव स्थान प्राप्त है गुरु के सम्मान और सत्कार के लिए ही इस दिन गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है। हिंदू धर्म के अनुसार भगवान वेद व्यास जी का जन्म आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को हुआ था जिसे आज के समय में गुरु पूर्णिमा के त्यौहार के रूप में मनाया जाता है। हिंदू देश में भगवान के ऊपर गुरु का महत्व बताया गया है क्योंकि भगवान का हमारे जीवन में महत्व ही हमें गुरु के द्वारा प्राप्त हुआ है। यह माना जाता है कि अच्छे बुरे संस्कारों धर्म अधर्म आदि का ज्ञान पूरे विश्व में गुरु के द्वारा ही अपने शिष्यों को दिया जाता है। इसी उद्देश्य को पूरा करते हुए गुरु पूर्णिमा का त्यौहार मनाया जाता हैऔर इस दिन पूरी श्रद्धा के साथ गुरु की उपासना की जाती है। हिंदू धर्म में यह मान्यता है कि मनुष्य को अपने जीवन में एक गुरु बनाना चाहिए। जिसके अंतर्गत गुरु की दीक्षा ली जाती है और गुरु द्वारा कहे गए आचरण का पालन किया जाता है माना जाता है कि इससे उस मनुष्य को जीवन में मार्गदर्शन प्राप्त होता है और उसके जीवन के कष्ट काम होते हैं और उसे जीवन की एक उचित राह मिलती है इस तरह उसका जीवन खुशहाल हो जाता है।

गुरु पूर्णिमा 2023

भारत देश के त्योहारों में गुरु पूर्णिमा का एक विशेष महत्व है। हिंदू धर्म सिख धर्म इन दोनों ही धर्मों में गुरु का एक अलग ही स्थान है, गुरु को सबसे ऊपर माना जाता है जोकि अंधकार को प्रकाश में बदलने की शक्ति रखता है। इस वर्ष महामारी के कारण सभी त्योहारों को घर में बैठकर परिवारजनों के साथ ही मिलकर मनाया गया उसी तरह अब गुरु पूर्णिमा को भी घर में रहकर ही मनाना सही रहेगा क्योंकि अभी भी महामारी का प्रकोप अपनी जगह है. पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी गुरु पूर्णिमा जुलाई महीने में है. 

गुरु पूर्णिमा कैसे मनाई जाती है

  1. गुरु पूर्णिमा के दिन जल्दी उठकर स्नान कर स्वच्छ कपड़ों का धारण किया जाता है।
  2. मंदिर अथवा घरों में बैठकर गुरु की उपासना की जाती है।
  3. गुरु के पूजन हेतु कई लोग उनकी फोटो के सामने पाठ पूजा करते हैं कई लोग ध्यान मुद्रा में रहकर गुरु मंत्र का जाप करते हैं।
  4. सिख समाज के लोग इस दिन गुरुद्वारे जाकर कीर्तन एवं पाठ पूजा करते हैं।
  5. गुरु पूर्णिमा के दिन कई लोग उपवास भी रखते हैं जिसमें एक वक्त भोजन एवं एक वक्त फलाहार आदि का नियम का पालन किया जाता है।
  6. गुरु पूर्णिमा के दिन दान दक्षिणा का आयोजन भी किया जाता है।
  7. खास तौर पर गुरु का सम्मान कर उनका पूजन करने की प्रथा है

गुरु पूर्णिमा 2023 में कब है

गुरु पूर्णिमा सन 2023 में जुलाई की 3 तारीख को है, जी हां 3 तारीख को ही आषाढ़ महीने की पूर्णिमा है. जिस दिन को गुरु पूर्णिमा भी कहा जाता है. मुहूर्त की बात करने तो 2 जुलाई को 08:21 से यह शुरू होगी और 3 जुलाई को 05:08 मिनिट पर यह समाप्त हो जाएगी. इसलिए इसे 3 तारीख को पूरा दिन ही मनाया जायेगा.

गुरु पूर्णिमा वर्ष 2023 तिथि एवं शुभ मुहूर्त

2 जुलाई08.21 सुबह से शुरू
3 जुलाई05.08 शाम पर समाप्त


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